सूचना प्रोद्योगिकी का उपयोग कर भारत न सिर्फ विश्व में अपनी पहचान बना पाया बल्कि कम लागत में सूचना प्रोद्योगिकी के दम पर मंगल मिशन कि अभूतपूर्व गाथा लिख डाला, जिसे पूरी दुनिया ने सराहा। जिन टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर देश डिजिटल हो रहा है वही टेक्नोलॉजी आधार का सभी जगह पर उपयोग लोगों के गुप्त जानकारी को सार्वजनिक कर रही है। ये गुप्त जानकारी कई बार सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा सार्वजनिक कर दिया जाता है तो कई बार आपकी जानकारी डिवाइस के माध्यम से हैक कर लिया जाता है। जी हाँ हालिया रिसर्च ये प्रूफ कर चुकी हैं कि इंक्रेपटेड बल्क डाटा को आसानी से डिक्रेप्ट कर प्रयोग किया जा सकता है।
जब भी आप आधार प्रयोग के लिए अपना उंगली या आँख का प्रयोग करते हैं उस स्कैन डाटा को डिवाइस कॉपी कर स्टोर कर सकता है या एक समय पर एक से अधिक नेटवर्क को भेजने (रिले) के लिए उपयोग आ सकता है। इस डिवाइस कि मदद से उपयोगकर्ता का उंगली स्कैन कर उसका कॉपी बनाने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है क्योंकि डिवाइस पारंपरिक स्कैनर कि तरह कार्य करता है। यह डिवाइस स्कीमर (एक छोटा मशीन जो एटीएम स्लॉट से अटैच हो कर कार्ड कि जानकारी को कॉपी करता है) कि तरह कार्य करने में सकक्षम है।
अन्य रूप में जब आधार का सत्यापन के पश्चात सबमिट किया जाता है उस समय मेन इन मिडिल अटैक (सर्वर एवं यूजर के बीच नेटवर्क से डाटा लेना) के माध्यम से आप का डाटा कॉपी कर स्टोर या उपयोग किया जा सकता है।
आज जब आप का बैंक खाता आधार से जुड़ा है और आप का आधार इतनी साधारण तरीके से लेकर प्रयोग किया जा सकता है जिससे न सिर्फ आपका बैंक खाता खाली होगा बल्कि देश कि अर्थव्यवस्था को भी ख़तरा है। अब तक ऐसे खतरों से निपटने के लिए न तो कोई डेटा सुरक्षा कानून है न ही कोई व्यवस्था, एक तरफ जिनके कंधों पर सुरक्षा का ये भार है वो खुद ही इस आफत से अंजान हैं तो दूसरी तरफ साइबर टेक्नोलॉजी का अपराध जगत हजार गुना तेजी से फल –फूल रहा है।
ऐसे में सुरक्षा का एक मात्र उपाय उपयोगकर्ता कि सावधानी है।



