आज दुनिया भर में डिजिटल प्राइवेसी को लेकर फेसबुक पर जाँच चल रहा है, लेकिन फेसबुक अकेला नहीं है जो हमारी प्राइवेसी से खेल रहा है। फेसबुक से कहीं ज्यादा ख़तरा डिजिटल प्राइवेसी को लेकर गूगल बना हुआ है फिर चाहे वो आपके क्रेडिट कार्ड कि जानकारी हासिल करना हो या एंडरोइड एप्लिकेशन के द्वारा यूजर का निजी जानकारी एकत्रित करना।
पिछले साल प्ले स्टोर ने प्राइवेसी और स्टैंडर्ड के नाम पर अपने लिस्ट से 1 लाख एप्लिकेशन को हटाया था। सोचने वाली बात है कि ये 1 लाख एप्लिकेशन का वेरिफिकेसन कैसे हुआ था ?
इससे ज्यादा चौकाने वाली बात ये है कि पिछले साल प्ले स्टोर से 1 लाख फेक व्हाट्स एप्लिकेशन डाउन –लोड हुआ था जिसे व्हाट्स- एप्प ने भी माना था।
आज प्ले स्टोर किसी भी एंडरोइड डिवाइस को हैक करने का आसान रास्ता बन चुका है। इन सब का एक मुख्य कारण ये है कि एंडरोइड एप्लिकेशन इन्स्टाल के समय सभी तरह के परमिशन पहले ही ले लेता है जिसे ब्लॉक या डिसेबल करने का औप्सन पुराने वर्जन के एंडरोइड में नहीं है और नए वर्जन के एंडरोइड में ब्लॉक या डिसेबल करने का औप्सन सीमित है। इन सबमें एंटी-वायरस या एंटी – मालवेयर भी कुछ नहीं कर सकता क्योंकि एंडरोइड एप्लिकेशन ने एक्सैस परमिशन पहले ही यूजर से ले रखा है।
फेसबुक सभी एंडरोइड डिवाइस को एक्सैस कर उसका कांटैक्ट, कॉल लॉग, मैसेज और निजी जानकारी को कलेक्ट करता है जिसे फेसबुक अकाउंट से आप भी डाउन लोड कर सकते हैं। पर यही जानकारी ios यूजर से एप्लिकेशन में ब्लॉक या डिसेबल करने का औप्सन होने के कारण नहीं कर पता और ios डिवाइस एंडरोइड के मुकाबले ज्यादा सिक्युर होता है।
इन सबसे बचने के लिए अपने एंडरोइड डिवाइस में लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करें । अपने एंडरोइड डिवाइस अनावस्यक एप्लिकेशन ना रखें और जहाँ तक संभव हो एप्लिकेशन के बजाय वेब पेज का उपयोग करें।
(नोट :- इंटरनेट बैंकिंग उपयोग करने वाले यूजर कभी भी अपना बैंकिंग अलर्ट सिम एंडरोइड डिवाइस में ना रखें। अगर संभव हो तो अलग से सिम का उपयोग करें और वो भी सैमसंग या नोकिया का बेसिक फोन में बैंकिंग सिम उपयोग करें।)



